गुप्त नवरात्रि आध्यात्मिक उन्नति और अपनी किस्मत बदलने का एक अत्यंत शक्तिशाली समय है। शास्त्रों के अनुसार, इन विशेष दिनों में मंत्रों का जाप करने से मिलने वाला फल सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना (10 से 100 गुना तक) बढ़ जाता है,। वर्ष 2026 में माघ गुप्त नवरात्रि 19 जनवरी से शुरू होकर 27 जनवरी तक मनाई जाएगी
अगर आप भी इस दौरान माता रानी की विशेष कृपा पाना चाहते हैं, तो इस ब्लॉग में दी गई चरण-दर-चरण विधि का पालन करें।

चरण 1: शुभ मुहूर्त और घट स्थापना (कलश स्थापना)
साधना की शुरुआत शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना के साथ होती है।
कलश स्थापना का समय: 19 जनवरी को सुबह 7:15 से 10:58 बजे तक सबसे उत्तम समय है। यदि आप इसमें चूक जाते हैं, तो दोपहर 12:27 से 1:12 के बीच 'अभिजीत मुहूर्त' में भी स्थापना कर सकते हैं।
कलश की विधि: माता रानी के बाईं ओर एक कलश रखें। कलश में अक्षत (चावल), मिश्री, दो लौंग, दो इलायची, हल्दी की गांठ, एक सिक्का और गंगाजल डालें,
नारियल की दिशा: कलश पर रखे नारियल का मुख हमेशा साधक (आपकी) तरफ होना चाहिए।
चरण 2: संकल्प लेना
पहले दिन साधना शुरू करने से पहले संकल्प लेना अनिवार्य है। दाहिने हाथ में जल लेकर अपना नाम, गोत्र, स्थान और अपनी मनोकामना बोलें।
यह प्रार्थना करें कि आप 9 दिनों तक ब्रह्मचर्य और नियमों का पालन करते हुए साधना करेंगे और माता रानी आप पर अपनी कृपा बनाए रखें। इसके बाद जल को जमीन पर छोड़ दें।
चरण 3: मंत्र का चुनाव और माला
अपनी योग्यता के अनुसार मंत्र चुनें:
शुरुआत करने वालों के लिए: "ॐ नमः शिवाय" या "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" का जाप करना सुरक्षित और प्रभावशाली है।
माता की साधना: "ॐ दुं दुर्गायै नमः" एक सुरक्षित मंत्र है। "ॐ क्रीं कालिकायै नमः" या "नवाण मंत्र" का जाप किसी विशेषज्ञ के मार्गदर्शन में ही करना चाहिए
माला: शिव मंत्र के लिए रुद्राक्ष और विष्णु मंत्र के लिए सफेद चंदन की माला का प्रयोग करें।
चरण 4: दैनिक साधना दिनचर्या
साधना के लिए रात्रि का समय (रात 9:00 से 12:00 बजे के बीच) सबसे शक्तिशाली माना जाता है।
1. गणेश पूजन: सबसे पहले गणेश जी का ध्यान करें।
2. गुरु वंदना: यदि गुरु मंत्र नहीं है, तो शिव जी को गुरु मानकर "ॐ नमः शिवाय" की तीन माला करें
3. दुर्गा सप्तशती पाठ: जो लोग पूर्ण पाठ करना चाहते हैं, वे देवी कवच, अर्गला स्तोत्रम और कीलकम का पाठ करने के बाद निर्धारित अध्याय पढ़ें और अंत में सिद्ध कुंजिका स्तोत्रम का पाठ करें
4. मंत्र जाप: कम से कम 30 से 40 मिनट तक अपने चुने हुए मंत्र का जाप करें,
चरण 5: साधना के मुख्य नियम
- ब्रह्मचर्य: 9 दिनों तक मन, वचन और कर्म से ब्रह्मचर्य का पालन करें,
- आहार: केवल सात्विक भोजन करें। लहसुन और प्याज का त्याग करें। यदि संभव हो तो व्रत रखें
- एकांत: साधना के दौरान मंदिर के पास या अलग बिस्तर पर अकेले सोएं ताकि ऊर्जा का संचार बेहतर हो सके।
- पीरियड्स के नियम: यदि बीच में पीरियड्स आ जाएं, तो बिना माला और बिना पुस्तक छुए ऑनलाइन या मन ही मन जाप करें। इसके लिए एक अलग आसन का प्रयोग करें
चरण 6: सुरक्षा और नकारात्मकता से मुक्ति
आसन सुरक्षा: साधना के दौरान दाहिने हाथ में जल लेकर अपने आसन के चारों ओर सुरक्षा घेरा बनाने की प्रार्थना करें ताकि नकारात्मक ऊर्जा आपको विचलित न करे।
हवन: प्रतिदिन छोटा हवन करना बहुत लाभदायक होता है। यदि प्रतिदिन संभव न हो, तो अष्टमी या नवमी को कन्या पूजन के साथ हवन अवश्य करें
गुप्त नवरात्रि की यह साधना आपके जीवन में शांति, समृद्धि और सुरक्षा लाती है। पूरे विश्वास और श्रद्धा के साथ माता की आराधना करें
अस्वीकरण:
यह जानकारी सूत्रों में दिए गए ब्लॉग के आधार पर तैयार की गई है। अधिक जानकारी या व्यक्तिगत मार्गदर्शन के लिए आप विशेषज्ञ से संपर्क कर सकते हैं।